जश्न ऐ विलायत हज़रत अली ज़ेरे सदारत एस एम् मासूम प्रतापगढ़ में |

आज मुसलमानो की सबसे बड़ी ईद थी जिसे ईद ऐ ग़दीर के नाम से जाना जाता है | यह सबसे बड़ी ईद इस लिए है की आज के दिन जो इस्लाम के क़वानीन हज़रत आदम के वक़्त से आने शुरू हुए थे वो आखिरी नबी हज़रत मुहम्मद (सव ) के आखिरी हज्ज से लौटते वक़्त मुकम्मल हो गए जो क़ुरआन की शक्ल में आज भी हमारे पास मौजूद है |
हर नबी ने इस्लाम के क़ानून के अनुसार जीवन गुज़ारा और हमें बताया की समाज में इस दुनिया में कैसे जिओ और जब ये दीन मुकम्मल हुआ वो दिन ग़दीर पे ऐलान का दिन था जिसे हम आज तक मनाने हैं |
 https://www.youtube.com/user/payameamnइस दिन की दूसरी अहमियत यह है की जिस दींन को एक लाख चैबीस हज़ार नबियों की मेहनत ने मुकम्मल किया उस दीन की हिफाज़त और उसे दनिया तक अपने अमल और किरदार से फैलाने वाले का एलान भी अल्लाह के हुक्म से हज़रत मुहम्मद सव ने किया और आज अल्लाह के हुक्म क़ुरआन की शक्ल में और हज़रत अली के किरदार से हम तक जो दीन पहुंचा वही सच्चा दीन है और इसकी दलील यह भी है की जब हज़रत अली ( अस ) को खलीफा लोगों ने बनाया तो सारे मुसलमान एक साथ हो गए कोई फ़िरक़ा नहीं रहा |
हज़रत अली ने जो दीन अल्लाह के हुक्म और अपने किरदार और हिदायतों के ज़रिये हम तक से पहुंचाया उसमे ज़ुल्म की कोई जगह नहीं थी ,आगे बढ़ के खुद से किसी पे हमले की इजाज़त नहीं है,दुसरे मज़हब की आस्था को ठेस पहुंचाने या उनके धार्मिक स्थानों को तोड़ने की इजाज़त नहीं | मुसलमानो को इजाज़त सिर्फ इस बात की है की अगर कोई आप पे हमला खुद से करे तो आप खुद को बचाने की लिए उनपे हमला कर सकते है |
इस दीन में गरीब की भूख धर्म देख के नहीं मिटाई जाती बल्कि इंसानियत के नाते बचाई जाती है | किसी अन्य धर्म की जान बचाने के लिए मुसलमान अपनी इबादतों जैसे नमाज़ रोज़ा हज को भी उस वक़्त तक छोड़ सकता है जब तक मुसीबत में फंसे इंसान की जान ना बच जाय |
यह वो इस्लाम है जिसमे आज भी ईमानदार मुसलमान चलता है जिसमे इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं और सारे दुनिया के इंसान भाई बताय गए हैं |
यही कारण है की आज ईद ऐ ग़दीर को सबसे बड़ी ईद बताया गया जिस से अगर मुसलमान अपना सही इस्लाम भूलने लगे तो उसे याद दिलाया जा सके |
......एस एम मासूम



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